नागाओ का रहस्य हिंदी पुस्तक | Nagaon Ka Rahasya Hindi PDF Book | Free Hindi Books

Nagao Ka Rahasya Hindi PDF Book Free Hindi Books

नागाओ का रहस्य ( Nagaon Ka Rahasya PDF ) के बारे में अधिक जानकारी

पुस्तक का नाम (Name of Book)नागाओ का रहस्य / Nagaon Ka Rahasya
पुस्तक का लेखक (Name of Author)Amish
पुस्तक की भाषा (Language of Book)हिंदी | Hindi
पुस्तक का आकार (Size of Book)6 MB
पुस्तक में कुल पृष्ठ (Total pages in Ebook)216
पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)उपन्यास / Novel

पुस्तक के कुछ अंश (Excerpts From the Book) :-

शिव ने तेजी से तलवार निकानी और अपनी पत्नी की ओर दौड़ पड़ा दौड़ते हुए ही वह चिल्लाया, ‘सती’ और साथ ही अपनी ढाल आगे की और करनी। यह उसकी बात में फंस जाएंगी ज्यों ही आने देखा कि अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर की ओर जाने वाली सड़क के पास, पेड़ों के झुंड की ओर झपट्टा मारकर सती पहुंच चुकी थी तो शिव जोर से चिल्लाया, रुको और उसके साथ ही उसने अपनी गति और बढ़ा दी।

हमुखीटा पहने योगाधारी नागा सावधानी से पीछे हटता जा रहा था सती उस पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित किए हुए थी उसने तलवार बाहर निकालकर अपने शरीर से दूर खायी हुई थी। ठीक उस मंझे हुए योद्धा की तरह जिसका शिकार उसकी आंखों के सामने होता है। शिव की सती के पास पहुंचने में कुछ क्षण लग गए। उसने सुनिश्चित कर लिया था कि सती अब सुरक्षित थी। उसके बाद दोनों मिलकर नागा का पीछा करने लगे। शिव का ध्यान उस नागा की ओर चला गया। वह भीचक्का था।

यह कुत्ता इतनी जल्दी इतनी अधिक दूर कैसे पहुंच गया? सहजता के साथ, आश्चर्यजनक फुर्ती से वृक्षों और ऊंचे-नीचे पहाड़ी दनुआ मैदानों के मध्य वह नागा यही सरलता से अपनी गति बढ़ाता हुआ दूर जाता दिख रहा था मेरु के ब्रह्मा मंदिर पर नागा से हुई लड़ाई शिव को याद आई, जब वह सती से पहली बार मिला था। या मंदिर पर उसके पैरों की धीमी गति मात्र युद्ध नीति थी।

शिव ने अपनी ढाल उतरकर पीठ पर लटका ली ताकि उसे और तेज भागने में आसानी हो सके। सती उसके साथ-साथ, उसकी गति से गति मिलाकर बाई ओर से दौड़ रही थी सहसा सती ने एक सांकेतिक ध्वनि निकाली और अपनी दाई ओर संकेत किया, जहां रास्ता दो भागों में विभक्त हो रहा था।

शिव ने सहमति में सिर हिलाया वे अलग हो जाएंगे और नागा को उस संकरी पहाड़ी पर दो विपरीत दिशाओं से घेरने का प्रयास करेंगे। शिव वहां से दाई ओर एक नए सिरे से तीव्र गति में भागा उसकी तलवार आक्रमण करने की मुद्रा में बाहर निकली हुई थी और उधर सती भी पूरी ताकत के साथ नागा के पीछे-पीछे उसी तरह भागती जा रही थी। नए मार्ग में मैदान समतल था जिसके कारण शिव तेजी से उस दूरी को कम कर पाया था उसने देखा कि नागा ने अपनी ढाल को दाहिने हाथ से पकड़ा हुआ था और बायां हाथ सुरक्षा के लिए मुक्त रखा था। शिव की त्योरी चढ़ गई।

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