विवेक चूड़ामणि हिंदी पुस्तक | Vivek Chudamani Hindi PDF

Vivek-Chudamani Hindi PDF by Gita Press

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

पुस्तक का नाम (Name of Book)विवेक चूड़ामणि / Vivek Chudamani PDF
पुस्तक का लेखक (Name of Author)गीता प्रेस / Geeta Press
पुस्तक की भाषा (Language of Book)हिंदी | Hindi
पुस्तक का आकार (Size of Book)9 MB
पुस्तक में कुल पृष्ठ (Total pages in Ebook)153
पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)धार्मिक / Religious

पुस्तक के कुछ अंश (Excerpts From the Book) :-

विवेकचूडामणि आदि शंकराचार्य द्वारा संस्कृत भाषा में विरचित प्रसिद्ध ग्रन्थ है जिसमें अद्वैत वेदान्त का निर्वचन किया गया है। इसमें ब्रह्मनिष्ठा का महत्त्व, ज्ञानोपलब्धि का उपाय, प्रश्न-निरूपण, आत्मज्ञान का महत्त्व, पंचप्राण, आत्म-निरूपण, मुक्ति कैसे होगी, आत्मज्ञान का फल आदि तत्त्वज्ञान के विभिन्न विषयों का अत्यन्त सुन्दर निरूपण किया गया है। माना जाता हैं कि इस ग्रन्थ में सभी वेदों का सार समाहित है। शंकराचार्य ने अपने बाल्यकाल में ही इस ग्रन्थ की रचना की थी।

विषय – निन्दा
शब्दादिभिः पञ्चभिरेव पंच
पञ्चत्वमापुः स्वगुणेन बद्धाः । कुरङ्गमातङ्गपतङ्गमीन
भृङ्गा नरः पञ्चभिरञ्चितः किम् ॥ ७८ ॥

अपने-अपने स्वभावके अनुसार शब्दादि पाँच विषयोंमेंसे केवल एक-एकसे बँधे हुए हरिण, हाथी, पतंग, मछली और भरि मृत्युको प्राप्त होते हैं, फिर इन पाँचोंसे जकड़ा हुआ मनुष्य कैसे बच सकता है?

दोषेण तीव्रो विषयः कृष्णसर्पविषादपि । विषं निहन्ति भोक्तारं द्रष्टारं चक्षुषाप्ययम् ॥ ७९ ॥
दोषमें विषय काले सर्पके विषसे भी अधिक तीव्र है, क्योंकि विष तो खानेवालेको ही मारता है, परन्तु विषय तो आँखसे देखनेवालेको भी नहीं छोड़ते।
विषयाशामहापाशाद्यो विमुक्तः सुदुस्त्यजात् ।
स एव कल्पते मुक्त्यै नान्यः षट्शास्त्रवेद्यपि ॥ ८० ॥

जो विषयोंकी आशारूप कठिन बन्धनसे छूटा हुआ है वही मोक्षका भागी होता है और कोई नहीं चाहे वह छहाँ दर्शनोंका ज्ञाता क्यों न हो।

आपात वैराग्यवतो मुमुक्षून्
भवाब्धिपारं प्रतियातुमुद्यतान् ।
आशाग्रहो मज्जयतेऽन्तराले
विगृह्य कण्ठे विनिवर्त्य वेगात् ॥ ८१ ॥

संसार सागरको पार करने के लिये उद्यत हुए क्षणिक वैराग्यवाले मुमुक्षुओंका आशारूपी ग्राह अति वेगसे बीचहीमें रोककर गला पकड़कर डुबो देता है।

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