[PDF] Shiv Puran in Hindi | शिव पुराण

[PDF] Shiv Puran in Hindi शिव पुराण

Shiv Mahapuran Katha in Hindi (शिव पुराण कथा)

‘शिवपुराण’ एक प्रमुख तथा सुप्रसिद्ध पुराण है, जिसमें परात्मपर परब्रह्म परमेश्वर के ‘शिव’ (कल्याणकारी) स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा एवं उपासना का सुविस्तृत वर्णन है[6]। भगवान शिवमात्र पौराणिक देवता ही नहीं, अपितु वे पंचदेवों में प्रधान, अनादि सिद्ध परमेश्वर हैं एवं निगमागम आदि सभी शास्त्रों में महिमामण्डित महादेव हैं। वेदों ने इस परमतत्त्व को अव्यक्त, अजन्मा, सबका कारण, विश्वपंच का स्रष्टा, पालक एवं संहारक कहकर उनका गुणगान किया है। श्रुतियों ने सदा शिव को स्वयम्भू, शान्त, प्रपंचातीत, परात्पर, परमतत्त्व, ईश्वरों के भी परम महेश्वर कहकर स्तुति की है। ‘शिव’ का अर्थ ही है- ‘कल्याणस्वरूप’ और ‘कल्याणप्रदाता’। परमब्रह्म के इस कल्याण रूप की उपासना उटच्च कोटि के सिद्धों, आत्मकल्याणकामी साधकों एवं सर्वसाधारण आस्तिक जनों-सभी के लिये परम मंगलमय, परम कल्याणकारी, सर्वसिद्धिदायक और सर्वश्रेयस्कर है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि देव, दनुज, ऋषि, महर्षि, योगीन्द्र, मुनीन्द्र, सिद्ध, गन्धर्व ही नहीं, अपितु ब्रह्मा-विष्णु तक इन महादेव की उपासना करते हैं। इस पुराण के अनुसार यह पुराण परम उत्तम शास्त्र है। इसे इस भूतल पर भगवान शिव का वाङ्मय स्वरूप समझना चाहिये और सब प्रकार से इसका सेवन करना चाहिये। इसका पठन और श्रवण सर्वसाधनरूप है। इससे शिव भक्ति पाकर श्रेष्ठतम स्थिति में पहुँचा हुआ मनुष्य शीघ्र ही शिवपद को प्राप्त कर लेता है। इसलिये सम्पूर्ण यत्न करके मनुष्यों ने इस पुराण को पढ़ने की इच्छा की है- अथवा इसके अध्ययन को अभीष्ट साधन माना है। इसी तरह इसका प्रेमपूर्वक श्रवण भी सम्पूर्ण मनोवंछित फलों के देनेवाला है। भगवान शिव के इस पुराण को सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है तथा इस जीवन में बड़े-बड़े उत्कृष्ट भोगों का उपभोग करके अन्त में शिवलोक को प्राप्त कर लेता है। यह शिवपुराण नामक ग्रन्थ चौबीस हजार श्लोकों से युक्त है। सात संहिताओं से युक्त यह दिव्य शिवपुराण परब्रह्म परमात्मा के समान विराजमान है और सबसे उत्कृष्ट गति प्रदान करने वाला है।

Shiv Puran in Hindi PDF Download (Gita Press Gorakhpur)

पुराणों में शिवमहापुराणका अत्यन्त महिमामय स्थान है। पुराणोंकी परिगणनामें वेदतुल्य, पवित्र और सभी लक्षणोंसे युक्त यह चौथा महापुराण है। इस ग्रन्थरत्नके आदि, मध्य और अन्तमें सर्वत्र भूतभावन भगवान् सदाशिवकी महिमाका प्रतिपादन किया गया है। इस पुराणमें परब्रह्म परमात्माकी सदाशिवरूपमें उपासनाका वर्णन है। भगवान् सदाशिवकी लीलाएँ अनन्त हैं, उनकी लीला-कथाओं तथा उनकी महिमाका वर्णन ही इस ग्रन्थका मुख्य प्रतिपाद्य विषय है, जिसके सम्यक् अवगाहनसे साधकों भक्तों का मन महादेव के पदपद्मपरागका भ्रमर बनकर मुक्तिमार्गका पथिक बन जाता है।

शिव महापुराण हिन्दी पुस्तक के बारे में अधिक जानकारी | More details about Shiv Mahapuran Hindi Book

हिंदू संस्कृति में कल्याणकारी सदाशिव का स्थान सभी देवताओं में सर्वोपरि है। भारत ही नहीं, अपितु समस्त विश्व में शिव की आराधना किसी न किसी रूप में की जाती है। सर्वाधिक प्राचीन देवों में भगवान आशुतोष शिव को इस सृष्टि का नियन्ता, पालनकर्ता और संहारक माना गया है। उन्हीं की इच्छा से इस सृष्टि का आविर्भाव होता है और उन्हीं की इच्छा से इसका विनाश होता है। प्रस्तुत ‘शिव पुराण’ में भगवान शिव के माहात्म्य, लीला और उनके कल्याणकारी स्वरूप का विस्तृत वर्णन किया गया है। योगेश्वर भगवान शिव महामंडित महादेव हैं। वे अनादि सिद्ध परमेश्वर और सभी देवों में प्रधान हैं। वेदों में भगवान शिव को अजन्मा, अव्यक्त, सबका कारण, विश्वस्रष्टा और संहारक माना गया है। शिव का अर्थ है कल्याणस्वरूप अर्थात सभी का भला करने वाला। वे देव-दानव, गंधर्व, किन्नर, मनुष्य, ऋषि-मुनि, सिद्ध, योगी, तपस्वी, संन्यासी, भक्त और नास्तिकों का भी कल्याण करने वाले हैं। विश्व कल्याण के लिए वे स्वयं गरल का पान करने वाले नीलकंठ हैं और संसार में प्रलय मचाने वाले नटराज। वे स्वयंभू भगवान हैं और सभी देव-दानवों के आराध्य हैं। इस महापुराण में शिवतत्व का विशद् विवेचन किया गया है। सरल गद्य-भाषा में शिव के में विविध अवतारों, नामों, लीलाओं, उनकी पूजा विधि, पंचाक्षर मंत्र की महत्ता, अनेकानेक ज्ञानप्रद आख्यान, शिक्षाप्रद तथा उद्देश्यपरक कथाओं का अत्यंत सुंदर आकलन किया गया है इस पुराण में। प्रयास किया गया है कि भाषा को सरल से सरल रखा गया है, ताकि श्रद्धालु पाठक शिव के कल्याणकारी स्वरूप और शिवतत्व के मर्म को सहज रूप से हृदयंगम कर सकें। जो भी श्रद्धालु और जिज्ञासुजन इस महान पुराण का अनुशीलन करके अपने जीवन को उपकृत कर पाएंगे क्योंकि शिव ही एक ऐसे परम ब्रह्म हैं, जो अच्छे-बुरे सभी के लिए सहज सुलभ हैं। यह उनकी विलक्षणता और अद्वितीयता ही है कि जहां अन्य साधनाओं में तमोगुण की उपेक्षा की जाती है, वहीं शिव तमोगुण का परिष्कार कर उसे ‘सत्व’ के रूप में परिवर्तित कर देते हैं। विष को स्वस्थ रखने की औषधि बनाने की युक्ति-साधना शिव के अलावा ओर कौन बताएगा। तभी तो महादेव हैं ये । इसीलिए उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है।

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

पुस्तक का नाम (Name of Book)Shiv Puran in Hindi / शिव पुराण PDF
पुस्तक का लेखक (Name of Author)Gita Press / गीता प्रेस
पुस्तक की भाषा (Language of Book)हिंदी | Hindi
पुस्तक का आकार (Size of Book)10 MB
पुस्तक में कुल पृष्ठ (Total pages in Ebook)845
पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)वेद-पुराण / Ved-Puran

पुस्तक के कुछ अंश (Excerpts From the Book) :-

सूत • जी द्वारा शिव पुराण की महिमा का वर्णन श्री शौनक जी ने पूछा-महाज्ञानी सूत जी, आप संपूर्ण सिद्धांतों के ज्ञाता हैं। कृपया मुझसे पुराणों के सार का वर्णन करें। ज्ञान और वैराग्य सहित भक्ति से प्राप्त विवेक की वृद्धि कैसे होती है? तथा साधुपुरुष कैसे अपने काम, क्रोध आदि विकारों का निवारण करते हैं? इस कलियुग में सभी जीव आसुरी स्वभाव के हो गए हैं। अतः कृपा करके मुझे ऐसा साधन बताइए, जो कल्याणकारी एवं मंगलकारी हो तथा पवित्रता लिए हो। प्रभु, वह ऐसा साधन हो, जिससे मनुष्य की शुद्धि हो जाए और उस निर्मल हृदय वाले पुरुष को सदैव के लिए ‘शिव’ की प्राप्ति हो जाए। श्री सूत जी ने उत्तर दिया- शौनक जी आप धन्य हैं, क्योंकि आपके मन में पुराण कथा को सुनने के लिए अपार प्रेम व लालसा है। इसलिए मैं तुम्हें परम उत्तम शास्त्र की कथा सुनाता हूं। वत्स! संपूर्ण सिद्धांत से संपन्न भक्ति को बढ़ाने वाला तथा शिवजी को संतुष्ट करने वाला अमृत के समान दिव्य शास्त्र है- ‘शिव पुराण’। इसका पूर्व काल में शिवजी ने ही प्रवचन किया था। गुरुदेव व्यास ने सनत्कुमार मुनि का उपदेश पाकर आदरपूर्वक इस पुराण की रचना की है। यह पुराण कलियुग में मनुष्यों के हित का परम साधन है। ‘शिव पुराण’ परम उत्तम शास्त्र है। इस पृथ्वीलोक में सभी मनुष्यों को भगवान शिव के विशाल स्वरूप को समझना चाहिए। इसे पढ़ना एवं सुनना सर्वसाधन है। यह मनोवांछित फलों को देने वाला है। इससे मनुष्य निष्पाप हो जाता है तथा इस लोक में सभी सुखों का उपभोग करके अंत में शिवलोक को प्राप्त करता है। ‘शिव पुराण’ में चौबीस हजार श्लोक हैं, जिसमें सात संहिताएं हैं। शिव पुराण परब्रह्म परमात्मा के समान गति प्रदान करने वाला है। मनुष्य को पूरी भक्ति एवं संयमपूर्वक इसे सुनना चाहिए। जो मनुष्य प्रेमपूर्वक नित्य इसको बांचता है या इसका पाठ करता है, निःसंदेह पुण्यात्मा है। भगवान शिव उस विद्वान पुरुष पर प्रसन्न होकर उसे अपना धाम प्रदान करते हैं। प्रतिदिन आदरपूर्वक शिव पुराण का पूजन करने वाले मनुष्य संसार में संपूर्ण भोगों को भोगकर भगवान शिव के पद को प्राप्त करते हैं। वे सदा सुखी रहते हैं। शिव पुराण में भगवान शिव का सर्वस्व है। इस लोक और परलोक में सुख की प्राप्ति के लिए आदरपूर्वक इसका सेवन करना चाहिए। यह निर्मल शिव पुराण धर्म, अर्थ, काम और मोक्षरूप चारों पुरुषार्थों को देने वाला है। अतः सदा प्रेमपूर्वक इसे सुनना एवं पढ़ना चाहिए।

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शिव पुराण में कितने भाग है?

शिवपुराण के 7 भाग हैं

शिवपुराण में कितने श्लोक हैं।

शिवपुराण में चौबीस हजार श्लोक हैं।

शिव जी की मृत्यु कैसे हुई?

भगवान शिव का न कोई आदि है न कोई अंत हैं. भगवान शिव ने किसी के गर्भ में से जन्म नहीं लिया हैं. इसलिए भगवान शिव की मृत्यु भी नहीं हो सकती हैं.

शिव पुराण कब पढ़ना चाहिए?

हर दिन हर समय शिव पुराण का पाठ शुभकारी ही है। पर फिर भी इसका पाठ अगर श्रावण मास में किया जाए तो अति शुभ फल देनेवाला माना गया है

शिव पुराण का मूल मंत्र क्या है?

शिवजी की आराधना का मूल मंत्र तो ऊं नम: शिवाय ही है।

शिव पुराण को सुनने से क्या लाभ होता है?

शिव के इस पुराण को सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है

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