सफ़ेद लाश : प्रियांशी जैन पीडीऍफ़ पुस्तक हिंदी में | Safed Lash By Priyanshi Jain PDF Book In Hindi Free

Safed Lash PDF - Priyanshi Jain (1)

सफ़ेद लाश ( Safed Lash PDF ) के बारे में अधिक जानकारी

पुस्तक का नाम (Name of Book)सफ़ेद लाश / Safed Lash
पुस्तक का लेखक (Name of Author)Priyanshi Jain
पुस्तक की भाषा (Language of Book)हिंदी | Hindi
पुस्तक का आकार (Size of Book)1 MB
पुस्तक में कुल पृष्ठ (Total pages in Ebook)130
पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)साहित्य / Literature

पुस्तक के कुछ अंश (Excerpts From the Book) :-

घना अंधेरा और उपर से उसमे जौरो से बरसाती बारिश, सारा आसमान झींगुरों की ‘कीरर्र’ आवाज़ से गूंज रहा था. एक बंगले के बगल मे खड़े एक विशालकाय पेड़ पर एक बारिश से भीगा हुआ उल्लू बैठा हुआ था. उसकी इधर उधर दौड़ती नज़र आखिर सामने बंगले की एक खिड़की पर जाकर रुकी. वह बंगले की एकलौती ऐसी खिड़की थी कि जिस से अंदर से बाहर रोशनी आ रही थी.
घर में उस खिड़की से दिख रही वह जलती हुई लाइट छोड़ कर सारे लाइट्स बंद थे. अचानक वहाँ उस खिड़की के पास आसरे के लिए बैठा कबूतरों का एक झुंड वहाँ से फड़फड़ाता हुआ उड़ गया. शायद वहाँ उन कबूतरों को कोई अद्रिश्य शक्ति का अस्तित्व महसूस हुआ होगा, खिड़की के काँच सफेद रंग की होने से बाहर से अंदर का कुछ नही दिख रहा था. क्या सचमुच वहाँ कोई अद्रिश्य शक्ति पहुच गयी थी?… और अगर पहुचि थी तो क्या उसे अंदर जाना था….? लेकिन खिड़की तो अंदर से बंद थी.
बेडरूम मे बेड पर कोई सोया हुआ था. उस बेड पर सोए साए ने अपनी करवट बदली और उसका चेहरा उस तरफ हो गया. इसलिए वह कौन था यह पहचान ना मुश्किल था. बेड के बगल मे एक चश्मा रखा हुया था. शायद जो भी कोई सोया हुआ था उसने सोने से पहले अपना चश्मा निकाल कर बगल मे रख दिया था. बेडरूम मे सब तरफ दारू की बॉटल, दारू के ग्लास, न्इस्तेमाल पेपर्स, मॅगज़ीन्स समान इधर उधर फैला हुआ था.

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