Rashmirathi By Ramdhari Simha Dinkar PDF | रश्मिरथी हिंदी में PDF

Table of Contents

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

पुस्तक का नाम (Name of Book)Rashmirathi By Ramdhari Simha Dinkar | रश्मिरथी
पुस्तक का लेखक (Name of Author)Ramdhari Singh Dinkar
पुस्तक की भाषा (Language of Book)हिंदी | Hindi
पुस्तक का आकार (Size of Book)49 MB
पुस्तक में कुल पृष्ठ (Total pages in Ebook)138
पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)कवि‍ताएँ / Poetry

पुस्तक के कुछ अंश (Excerpts From the Book) :-

Rashmirathi By Ramdhari Simha Dinkar PDF Summary

“रश्मिरथी” एक हिंदी महाकाव्य है, जिसे 1952 में हिंदी के प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा था। इस काव्य में महाभारत के एक मुख्य पात्र कर्ण की कहानी को बताया गया है। कर्ण एक ऐसा नायक था, जिसने अपने जन्म के अनुकूलताओं के बावजूद अपने पराक्रम, उदारता और नैतिकता से अपनी पहचान बनाई। इस काव्य में कर्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं को रोचक और गहरे ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

इस काव्य के सात सर्ग हैं, जिनमें कर्ण के जन्म, बचपन, शिक्षा, विवाह, राज्याभिषेक, युद्ध और मृत्यु का वर्णन है। इस काव्य में कर्ण के साथ उनके गुरु परशुराम, उनकी माता कुंती, उनका मित्र दुर्योधन, उनका शत्रु अर्जुन और उनका मार्गदर्शक श्रीकृष्ण के बीच के संवादों और संघर्षों को बखूबी उजागर किया गया है। इस काव्य में दिनकर ने कर्ण को एक आदर्श मानव के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, परन्तु कभी भी अपने सिद्धांतों और मित्रता का त्याग नहीं किया। इस काव्य में दिनकर ने समाज में प्रचलित अन्याय, पाखंड, वर्ण-भेद और युद्ध की बुराइयों का भी खुला आलोचना किया है।

“रश्मिरथी” एक ऐसा काव्य है, जो हिंदी साहित्य के इतिहास में अपनी अनूठी शैली, भावुकता, रस, छंद और भाषा के कारण अमर है। इस काव्य को पढ़कर पाठक कर्ण के चरित्र से प्रभावित होते हैं, और उन्हें जीवन के उच्च मूल्यों का बोध होता है।

वर्षों तक वन में घूम-घूम,
बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,
सह धूप-घाम, पानी-पत्थर,
पांडव आये कुछ और निखर।
सौभाग्य न सब दिन सोता है,
देखें, आगे क्या होता है।

मैत्री की राह बताने को,
सबको सुमार्ग पर लाने को,
दुर्योधन को समझाने को,
भीषण विध्वंस बचाने को,
भगवान् हस्तिनापुर आये,
पांडव का संदेशा लाये।

कृष्ण की चेतावनी

‘दो न्याय अगर तो आधा दो,
पर, इसमें भी यदि बाधा हो,
तो दे दो केवल पाँच ग्राम,
रक्खो अपनी धरती तमाम।
हम वहीं खुशी से खायेंगे,
परिजन पर असि न उठायेंगे!

दुर्योधन वह भी दे ना सका,
आशीष समाज की ले न सका,
उलटे, हरि को बाँधने चला,
जो था असाध्य, साधने चला।
जब नाश मनुज पर छाता है,
पहले विवेक मर जाता है।

कृष्ण की चेतावनी

हरि ने भीषण हुंकार किया,
अपना स्वरूप-विस्तार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
भगवान् कुपित होकर बोले-
‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,
हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।

यह देख, गगन मुझमें लय है,
यह देख, पवन मुझमें लय है,
मुझमें विलीन झंकार सकल,
मुझमें लय है संसार सकल।
अमरत्व फूलता है मुझमें,
संहार झूलता है मुझमें।

कृष्ण की चेतावनी

‘उदयाचल मेरा दीप्त भाल,
भूमंडल वक्षस्थल विशाल,
भुज परिधि-बन्ध को घेरे हैं,
मैनाक-मेरु पग मेरे हैं।
दिपते जो ग्रह नक्षत्र निकर,
सब हैं मेरे मुख के अन्दर।

‘दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख,
मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख,
चर-अचर जीव, जग, क्षर-अक्षर,
नश्वर मनुष्य सुरजाति अमर।
शत कोटि सूर्य, शत कोटि चन्द्र,
शत कोटि सरित, सर, सिन्धु मन्द्र।

कृष्ण की चेतावनी

‘शत कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश,
शत कोटि विष्णु जलपति, धनेश,
शत कोटि रुद्र, शत कोटि काल,
शत कोटि दण्डधर लोकपाल।
जञ्जीर बढ़ाकर साध इन्हें,
हाँ-हाँ दुर्योधन! बाँध इन्हें।

‘भूलोक, अतल, पाताल देख,
गत और अनागत काल देख,
यह देख जगत का आदि-सृजन,
यह देख, महाभारत का रण,
मृतकों से पटी हुई भू है,
पहचान, इसमें कहाँ तू है।

कृष्ण की चेतावनी

‘अम्बर में कुन्तल-जाल देख,
पद के नीचे पाताल देख,
मुट्ठी में तीनों काल देख,
मेरा स्वरूप विकराल देख।
सब जन्म मुझी से पाते हैं,
फिर लौट मुझी में आते हैं।

‘जिह्वा से कढ़ती ज्वाल सघन,
साँसों में पाता जन्म पवन,
पड़ जाती मेरी दृष्टि जिधर,
हँसने लगती है सृष्टि उधर!
मैं जभी मूँदता हूँ लोचन,
छा जाता चारों ओर मरण।

कृष्ण की चेतावनी

‘बाँधने मुझे तो आया है,
जंजीर बड़ी क्या लाया है?
यदि मुझे बाँधना चाहे मन,
पहले तो बाँध अनन्त गगन।
सूने को साध न सकता है,
वह मुझे बाँध कब सकता है?

‘हित-वचन नहीं तूने माना,
मैत्री का मूल्य न पहचाना,
तो ले, मैं भी अब जाता हूँ,
अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ।
याचना नहीं, अब रण होगा,
जीवन-जय या कि मरण होगा।

कृष्ण की चेतावनी

‘टकरायेंगे नक्षत्र-निकर,
बरसेगी भू पर वह्नि प्रखर,
फण शेषनाग का डोलेगा,
विकराल काल मुँह खोलेगा।
दुर्योधन! रण ऐसा होगा।
फिर कभी नहीं जैसा होगा।

‘भाई पर भाई टूटेंगे,
विष-बाण बूँद-से छूटेंगे,
वायस-श्रृगाल सुख लूटेंगे,
सौभाग्य मनुज के फूटेंगे।
आखिर तू भूशायी होगा,
हिंसा का पर, दायी होगा।’

कृष्ण की चेतावनी

थी सभा सन्न, सब लोग डरे,
चुप थे या थे बेहोश पड़े।
केवल दो नर ना अघाते थे,
धृतराष्ट्र-विदुर सुख पाते थे।
कर जोड़ खड़े प्रमुदित,
निर्भय, दोनों पुकारते थे ‘जय-जय’!

साभार- कविताकोश

नीचे दिए गए लिंक के द्वारा आप रश्मिरथी बुक PDF | Rashmirathi By Ramdhari Simha Dinkar PDF in hindi डाउनलोड कर सकते हैं ।

Read Also: 1.एकादशोपनिषद | Ekadashopnishad PDF in Hindi 2.रिच डैड पुअर डैड (Rich Dad Poor Dad Hindi) PDF 3.The Compound Effect by Darren Hardy Hindi PDF Book | द कंपाउंड इफ़ेक्ट 4.श्रीमद् देवी भागवत पुराण हिंदी में | Devi Bhagwat Puran PDF 5.Acupressure Book in Hindi PDF | एक्यूप्रेशर चिकित्सा PDF 6.सौंदर्य लहरी हिंदी अर्थ सहित pdf  | soundarya lahari book hindi pdf 7.श्रीमद्भगवद्‌गीता | Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi PDF

Download

हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें

5/5 - (1 vote)

Leave a Comment